Sumedh Mudgalkar Poetry in Hindi
सुमेध मुद्गलकर की कवितायें जो मेरा है 💗 लम्हें यहाँ कुछ ही हैं, और करना उसमे बहुत कुछ हैं| सब कुछ तो हैं पर बता इसमें तेरा क्या है, दुनिया में अपने आस पास देखू तो दो चीजे मुझे दिखती है, एक हकीकत और दूसरा नजरिया| हर एक का अपना एक नजरिया हैं, किसी को भलाई पे भरोसा है, किसी को बुराई ही असलियत लगती है, किसी को दुनिया की परवाह नही, तो कोई बार बार बेवक़ूफ़ बनके भी सबको अपना ही मानता है| कैसा खेल है ये नज़रिए का, कोई अच्छाई में भी कोई न कोई बुराई ढूंढ ही लेता हैं तो कोई बुराई मे भी अच्छाई देख ही लेता है पर ये जिंदगी अपनी दोस्ती जरूर निभाती है बड़े तरीके से ये ठोकरे मारती है एक नए तरीके से खुद कों और दुनिया को देखने का मौका देती हैं बहती इन हवाओ के बवंडर मे छोटी से फूल की खुशबू सूंघने पर मजबूर करती है जिंदगी है ही कुछ ऐसी की यहाँ अपने भी हमे कभी न कभी छोर के चले जाते हैं कामियाबी भी कभी धुंधली हो जाती हैं गुरूर , सपने , भरोसे , उम्मीदें , कामियाबी सब टूट जाते हैं और सभी कभी ना कभी अकेला महसूस करते हैं और जिस...